कोटा में सामाजिक पत्रकार रवि सामरिया प्रकरण ने पकड़ा तूल, एफआईआर, पुलिस कार्रवाई और कथित मीडिया ट्रायल पर उठे गंभीर सवाल
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कोटा। शहर में स्वतंत्र सामाजिक पत्रकार रवि सामरिया से जुड़े विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। रवि सामरिया ने आरोप लगाया है कि आयुर्वेदिक उपचार के नाम पर हुए विवाद के बाद उनके खिलाफ सुनियोजित तरीके से एफआईआर दर्ज करवाई गई और पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ कुछ मीडिया संस्थानों में एकतरफा खबरें चलाकर उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया गया।
उनका कहना है कि यह पूरा घटनाक्रम एक सामाजिक पत्रकार को बदनाम करने की साजिश का हिस्सा था। रवि सामरिया के अनुसार संबंधित महिला द्वारा दर्ज करवाई गई एफआईआर के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की, लेकिन बाद में न्यायालय में हुई सुनवाई के दौरान पुलिस की कथित कहानी को सिरे से खारिज कर दिया गया। रवि सामरिया का दावा है कि इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट हुआ कि तथ्यों की पर्याप्त जांच किए बिना उन्हें आरोपी के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिससे सामाजिक और पेशेवर स्तर पर उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा।
रवि सामरिया का कहना है कि आयुर्वेदिक उपचार के नाम पर पहले उन्हें बीमारी ठीक करने का भरोसा दिया गया और बाद में लाखों रुपये की मांग की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि उपचार के दौरान कथित रूप से फोटो-वीडियो बनाकर दबाव बनाया गया तथा समझौते के लिए धमकियां दी गईं। रवि सामरिया का दावा है कि इस पूरे विवाद के चलते उनकी तबीयत और बिगड़ गई तथा आर्थिक संकट भी गहरा गया। मीडिया की भूमिका को लेकर भी उन्होंने गंभीर सवाल उठाए हैं।
सूत्रों के हवाले से उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मीडिया संस्थानों को संबंधित आयुर्वेद हॉस्पिटल की संचालिका द्वारा विज्ञापन दिए जाते थे और इसी दबाव तथा लालच के कारण उनके खिलाफ कथित मीडिया ट्रायल चलाया गया। उनका कहना है कि बिना उनका पक्ष जाने खबरें प्रकाशित-प्रसारित की गईं और पहचान व निजी जानकारी सार्वजनिक कर दी गई, जिससे परिवार की सुरक्षा पर भी असर पड़ा।
रवि सामरिया ने यह भी आरोप लगाया है कि आयुर्वेद हॉस्पिटल की संचालिका दीपा सुबिन उर्फ दीपा राजन के खिलाफ कथित रूप से धोखाधड़ी और आर्थिक ठगी से जुड़े कई मामले विभिन्न न्यायालयों में लंबित हैं। हालांकि इन मामलों की आधिकारिक पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही संभव है।
अब रवि सामरिया पूरे प्रकरण को लेकर न्यायालय की शरण लेने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि वे संबंधित पुलिस अधिकारियों, मीडिया संस्थानों और अन्य आरोपित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग करेंगे। साथ ही सुरक्षा उपलब्ध कराने, कथित रूप से प्रसारित भ्रामक खबरों को हटाने और क्षतिपूर्ति दिलाने की भी मांग की जाएगी।
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