नन्हे योद्धा कनिष्क की जीत: जटिल बोन ग्राफ्ट सर्जरी के बाद लौटी मुस्कान, साहस बना देशभर के बच्चों के लिए प्रेरणा
News Media House By AIIMS Hospital Dental Kanishk 12 year Bron Grafting Operation
न्यूज़ एजेंसी मीडिया हाउस/ नई दिल्ली। कोटा।
कभी दर्द, ऑपरेशन और लंबी चिकित्सा प्रक्रिया से घिरा एक मासूम आज साहस, धैर्य और उम्मीद की नई पहचान बन गया है। कोटा राजस्थान के शिवपुरा निवासी रविशंकर के 12 वर्षीय पुत्र कनिष्क ने दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में हुई अत्यंत जटिल बोन ग्राफ्ट सर्जरी के बाद नई जिंदगी की ओर मजबूत कदम बढ़ाया है। परिजनों के अनुसार लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला इस उपचार में विशेष सहयोगी रहे। जन्मजात कटे होंठ-तालु और जबड़े की हड्डी से जुड़ी गंभीर समस्या से जूझ रहे कनिष्क का 13 फरवरी को विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने चार घंटे तक चली संवेदनशील सर्जरी के माध्यम से इलाज किया।
इस ऑपरेशन में बच्चे के कूल्हे की हड्डी से बोन निकालकर ऊपरी जबड़े में प्रत्यारोपित की गई, जिसे चिकित्सा विज्ञान में अत्यंत चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया माना जाता है। जिंदगी बदलने वाला ऑपरेशन एम्स के दंत एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग ने उच्च तकनीक और अनुभव के साथ यह ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा किया। बच्चों में बोन ग्राफ्टिंग केवल सर्जरी नहीं होती बल्कि भविष्य की मुस्कान, बोलने की क्षमता, दांतों के विकास और चेहरे की संरचना को नया आधार देने वाली प्रक्रिया होती है।
- चार सर्जरी का संघर्ष, हौसले की मिसाल :
सर्जरी के बाद कनिष्क के मुख के दाहिने हिस्से में 12 और दुसरी तरफ 4 टांके लगाए गए 2 टांके होठ पर और ब्लड ड्रेन के साथ नीचे राइट साइड पर हड्डी प्रत्यारोपण के बाद 8 टांके वहां लगाएं गए लेकिन आश्चर्यजनक रूप से इस नन्हे बालक ने पूरे उपचार के दौरान असाधारण साहस दिखाया। इतने जटिल ऑपरेशन के बावजूद उसने डर को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। यह कनिष्क की अब तक की चौथी बड़ी सर्जरी रही। इससे पहले भी वह तीन जटिल ऑपरेशनों से गुजर चुका है। लंबे उपचार, दर्द और अस्पताल की चुनौतियों के बीच भी उसके चेहरे की मुस्कान और आत्मविश्वास कभी कम नहीं हुआ।
- साहस ने जीता हर डर :
डॉक्टरों के अनुसार बोन ग्राफ्टिंग सफल होने के बाद भविष्य में अंतिम चरण की प्लास्टिक सर्जरी की जाएगी, जिससे चेहरे की बनावट पूर्ण रूप से संतुलित हो सकेगी। साथ ही स्पीच थेरेपी के माध्यम से कनिष्क अब पहले की तुलना में स्पष्ट बोलने लगा है। अस्पताल के केयर यूनिट में लगभग दस दिन तक भर्ती रहने के दौरान कनिष्क ने जिस धैर्य और मानसिक मजबूती का परिचय दिया, वह डॉक्टरों और स्टाफ के लिए भी प्रेरणादायक रहा। उपचार के कठिन दौर में भी वह मुस्कुराता रहा और हर मेडिकल प्रक्रिया का बहादुरी से सामना करता रहा। आज कनिष्क केवल एक मरीज नहीं, बल्कि उन हजारों बच्चों की उम्मीद बन गया है जो जन्मजात कटे होंठ-तालु जैसी समस्या से जूझ रहे हैं।
- सहयोग बना उपचार की ताकत :
पूरे उपचार के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का विशेष सहयोग, संवेदनशील मार्गदर्शन और निरंतर प्रयास परिवार के लिए बड़ी शक्ति साबित हुआ। परिवार ने बताया कि कठिन समय में मिला यह सहयोग उपचार की राह आसान बनाने वाला रहा। कनिष्क के पिता रविशंकर ने भावुक होकर कहा कि डॉक्टरों की मेहनत, समाज की प्रार्थनाओं और शुभचिंतकों के आशीर्वाद से उनके बेटे को नया जीवन मिला है।
- महंगा इलाज, लेकिन उम्मीद सबके लिए :
विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रकार की जटिल बोन ग्राफ्ट सर्जरी निजी अस्पतालों में अत्यंत महंगी होती है, जिसके कारण कई परिवार इलाज से वंचित रह जाते हैं। देश में जन्मजात कटे होंठ-तालु से प्रभावित बच्चों में केवल सीमित प्रतिशत ही समय पर उपचार प्राप्त कर पाते हैं। कनिष्क का सफल उपचार यह संदेश देता है कि सही समय पर इलाज संभव है और सरकारी संस्थानों में विश्वस्तरीय चिकित्सा उपलब्ध है।
- नई शुरुआत की ओर कदम :
आज कनिष्क स्वस्थ है, आत्मविश्वास से भरा है और मुस्कुराते हुए अपने घर कोटा लौट चुका है। आगे की चिकित्सा प्रक्रिया के साथ वह सामान्य जीवन की ओर बढ़ रहा है। नन्हे योद्धा की यह कहानी केवल एक सर्जरी की सफलता नहीं, बल्कि साहस, विश्वास और चिकित्सा विज्ञान की जीत की कहानी है जो यह बताती है कि मजबूत हौसले के सामने सबसे कठिन बीमारी भी हार मान लेती है।
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