कोटा में किन्नर समाज की गुरु-चेला परंपरा पर विवाद, बाहरी दखल से आपसी गुटबाजी तेज

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May 19, 2026 - 10:04
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कोटा में किन्नर समाज की गुरु-चेला परंपरा पर विवाद, बाहरी दखल से आपसी गुटबाजी तेज

न्यूज़ स्पेशल : मीडिया हाउस राजस्थान न्यूज़ एजेंसी । कोटा

हाल ही में कुछ सामाजिक संगठनों द्वारा जारी प्रेस नोट में यह दावा किया गया कि किन्नर समाज ने मांगलिक अवसरों पर बधाई राशि को लेकर सर्वसम्मति से निर्णय लिया है, जबकि मूल किन्नर सोसायटी के अनेक गुरु-चेला परंपरा से जुड़े प्रतिनिधि इस दावे का खुलकर विरोध कर रहे हैं। विरोध करने वाले किन्नर समुदाय का कहना है कि कुछ चुनिंदा लोगों की बैठक को पूरे किन्नर समाज की सहमति बताना तथ्यात्मक रूप से गलत, भ्रामक और एकपक्षीय है।

मूल किन्नर समाज ने स्पष्ट किया कि बधाई की परंपरा सदियों पुरानी सामाजिक एवं सांस्कृतिक व्यवस्था का हिस्सा है, जिसे “जबरन वसूली” जैसे शब्दों से जोड़कर पूरे समुदाय की छवि धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। यदि कहीं कोई व्यक्ति गलत गतिविधि करता है तो उसके खिलाफ प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन पूरे समुदाय को अपराधी की तरह प्रस्तुत करना अनुचित और निंदनीय है।

किन्नर समाज के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने कहा कि भारत में अब तक ऐसा कोई कानून, सरकारी अधिसूचना अथवा न्यायालय का सार्वभौमिक आदेश मौजूद नहीं है, जो पारंपरिक बधाई प्रथा को गैरकानूनी घोषित करता हो या किसी निजी संगठन को पूरे किन्नर समाज के लिए न्यूनतम एवं अधिकतम राशि तय करने का अधिकार देता हो। 

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक नाल्सा के निर्णय में ट्रांसजेंडर/किन्नर समुदाय को संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत समानता, गरिमा और सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार प्रदान किया गया है। साथ ही Transgender Persons (Protection of Rights) Act, 2019 भी ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों और सामाजिक संरक्षण की बात करता है, न कि उनकी पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था में बाहरी हस्तक्षेप की। किन्नर समाज ने यह भी कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेशों का गलत अर्थ निकालकर जनता में भ्रम फैलाया जा रहा है।

अदालतों ने केवल जबरदस्ती वसूली, धमकी या अवैध गतिविधियों पर टिप्पणी की है, न कि पारंपरिक बधाई व्यवस्था को समाप्त करने का कोई आदेश दिया है। मूल किन्नर समाज का कहना है कि “फर्जी किन्नरों” की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, क्योंकि कुछ असामाजिक तत्व समुदाय की छवि खराब कर रहे हैं। लेकिन इस बहाने वास्तविक किन्नरों की परंपरा, सम्मान और आजीविका को निशाना बनाना स्वीकार नहीं किया जाएगा।

किन्नर समाज के प्रतिनिधियों ने मांग की है कि भविष्य में किसी भी निर्णय को पूरे समाज की सहमति बताने से पहले सभी प्रमुख अखाड़ों, गुरु-चेला परंपरा से जुड़े समूहों, वरिष्ठ किन्नर प्रतिनिधियों तथा प्रशासन की उपस्थिति में खुली बैठक आयोजित की जाए, ताकि एकतरफा बयानबाजी और सामाजिक भ्रम की स्थिति पैदा न हो।

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