नसबंदी ऑपरेशन के बाद 33 वर्षीय महिला की हालत बिगड़ी, जेके लोन अस्पताल पर गंभीर लापरवाही के आरोप

Kota JK Lon Hospital accused of gross negligence big news rajasthan

May 16, 2026 - 23:09
May 16, 2026 - 23:10
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नसबंदी ऑपरेशन के बाद 33 वर्षीय महिला की हालत बिगड़ी, जेके लोन अस्पताल पर गंभीर लापरवाही के आरोप
नसबंदी ऑपरेशन के बाद 33 वर्षीय महिला की हालत बिगड़ी, जेके लोन अस्पताल पर गंभीर लापरवाही के आरोप

संक्रमण, किडनी संबंधी जटिलता और उपचार में लापरवाही का आरोप; मामला लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला तक पहुंचा

कोटा‌ शहर के जेके लोन अस्पताल में उपचार व्यवस्था और संक्रमण नियंत्रण को लेकर एक और गंभीर मामला सामने आया है। शिवपुरा निवासी 33 वर्षीय साक्षी को 27 मार्च 2026 को नसबंदी ऑपरेशन के लिए जेके लोन अस्पताल के गायनिक वार्ड “सी” में भर्ती किया गया था। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान हुई गंभीर चिकित्सीय लापरवाही और बाद में उचित उपचार नहीं मिलने से साक्षी की हालत लगातार बिगड़ती चली गई तथा अब उसकी जान को खतरा पैदा हो गया है। पीड़िता के पति के अनुसार साक्षी को डॉ. ममता शर्मा द्वारा नसबंदी ऑपरेशन का परामर्श दिया गया था, लेकिन ऑपरेशन रेजिडेंट डॉक्टर शैया जैन द्वारा किया गया।

ऑपरेशन के बाद बताया गया कि पेट से “गांठ” भी निकाली गई है। इसके बाद साक्षी को गायनिक आईसीयू पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड के बेड नंबर 5 पर भर्ती रखा गया, जहां लगातार संक्रमण और सीरम रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बावजूद गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ द्वारा बिना स्पष्ट जानकारी के मनमाने इंजेक्शन और दवाएं दी जाती रहीं। मामले की मौखिक शिकायत अस्पताल अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा से भी की गई, लेकिन परिजनों का आरोप है कि उन्होंने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि “यह डॉ. ममता शर्मा की मरीज है, उनसे ही बात करो।

पीड़िता के पति ने अस्पताल में फैली गंदगी, संक्रमण का खतरा और अव्यवस्था की जानकारी भी दी, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। परिवार का कहना है कि ऑपरेशन के अगले ही दिन साक्षी को छुट्टी देने की तैयारी कर ली गई थी। इस पर पति ने मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. निलेश जैन को फोन पर शिकायत की, जिसके बाद कुछ दिन और भर्ती रखा गया। आरोप है कि बाद में बिना टांके काटे ही छुट्टी दे दी गई तथा नसबंदी से जुड़ी सरकारी सहायता राशि भी नहीं दी गई। घर लौटने के बाद साक्षी की हालत लगातार बिगड़ती गई। तेज बुखार, पेट में असहनीय दर्द, सूजन, लगातार ब्लीडिंग और टाइफाइड जैसी स्थिति बन गई।

परिजनों ने दोबारा जेके लोन अस्पताल में दिखाया तो आरोप है कि रेजिडेंट डॉक्टरों ने मामले को सामान्य बताकर वापस भेज दिया और गंभीरता से जांच नहीं की। लगातार एक महीने तक परेशानी झेलने के बाद शहर के एक निजी नर्सिंग होम में सोनोग्राफी करवाई गई, जिसमें कथित रूप से सामने आया कि ऑपरेशन के दौरान यूटरस की सही सफाई नहीं की गई और अंदर टिश्यू रह गए। परिजनों का आरोप है कि इसी लापरवाही के कारण संक्रमण फैला और खून बहने जैसी गंभीर स्थिति बन गई।

वर्तमान में साक्षी की हालत नाजुक बताई जा रही है। पीड़िता के पति ने अस्पताल प्रशासन पर महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा से खिलवाड़ करने का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि गायनिक आईसीयू वार्ड में पुरुष गार्ड तैनात थे, नर्सिंग स्टाफ प्रशिक्षित नहीं था और मरीज महिलाओं व परिजनों से दुर्व्यवहार किया जाता था। आरोप यह भी है कि कई रेजिडेंट डॉक्टरों का व्यवहार अभद्र था तथा बुनियादी चिकित्सा प्रक्रियाओं में भी लापरवाही दिखाई गई। इस पूरे मामले ने एक बार फिर जेके लोन अस्पताल और न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रसूताओं की मौत, संक्रमण और किडनी फेलियर के लगातार सामने आ रहे मामलों के बीच अब यह मामला लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला तक पहुंच चुका है। सामाजिक संगठनों और आमजन ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और पीड़ित महिला को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने की मांग की है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से फिलहाल मामले की जांच जारी होने की बात कही जा रही है, लेकिन पीड़ित परिवार का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो किसी और महिला की जिंदगी भी ऐसी लापरवाही की भेंट चढ़ सकती है।

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