राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी राहत: आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में आरोपी को जमानत
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जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने उधार राशि की वसूली से जुड़े आत्महत्या प्रकरण में महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए आरोपी को जमानत प्रदान कर दी। माननीय न्यायाधीश उमा शंकर व्यास की एकलपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें, केस डायरी, कॉल रिकॉर्डिंग सहित उपलब्ध सामग्री का अवलोकन करने के बाद यह आदेश दिया। प्रकरण के अनुसार मृतक की पत्नी द्वारा आरोप लगाया गया था कि उसके पति को उधार दी गई रकम की वसूली को लेकर प्रताड़ित किया गया, जिससे आहत होकर उसने आत्महत्या कर ली।
अभियोजन पक्ष ने मामले को गंभीर बताते हुए जमानत का विरोध किया। वहीं बचाव पक्ष की ओर से न्यायालय में तर्क दिया गया कि आरोपी ने केवल अपनी दी हुई राशि की मांग की थी। आज के समय में सामान्य व्यक्ति भी बैंक अथवा निजी स्रोत से ऋण लेता है और उसकी विधिसम्मत रिकवरी की प्रक्रिया होती है, चेक लिए जाते हैं तथा भुगतान का तकाजा किया जाता है। यदि केवल भुगतान मांगने मात्र से किसी व्यक्ति द्वारा आत्महत्या कर लेने पर ऋणदाता को ही दंडित माना जाए तो यह एक गंभीर सामाजिक स्थिति उत्पन्न कर देगा। आत्महत्या किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकती।
न्यायालय ने आदेश में उल्लेख किया कि प्रकरण में अनुसंधान पूर्ण हो चुका है और आरोप पत्र प्रस्तुत किया जा चुका है। आरोपी न्यायिक अभिरक्षा में था तथा विचारण में समय लगना संभावित है। उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए तथा प्रकरण के गुण-दोषों पर अंतिम टिप्पणी किए बिना न्यायालय ने आरोपी को शर्तों सहित जमानत का लाभ प्रदान करना उचित माना। अदालत ने निर्देश दिया कि आरोपी एक लाख रुपये का बंधपत्र एवं पचास-पचास हजार रुपये की दो जमानतें प्रस्तुत करेगा तथा विचारण न्यायालय द्वारा निर्धारित तिथियों पर उपस्थित रहेगा। यह आदेश ऋण वसूली और आत्महत्या से जुड़े मामलों में कानूनी संतुलन की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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