पुलिस गिरफ्तार व्यक्तियों की फोटो वायरल करने पर राजस्थान हाईकोर्ट सख्त, 24 घंटे में सभी सोशल पोस्ट हटाने का आदेश
Court Order By Rajasthan High Court Jodhpur News by MHR News Media House Rajasthan
न्यूज़ एजेंसी/मीडिया हाउस राजस्थान, 21 जनवरी 2026।
राजस्थान हाईकोर्ट ने पुलिस द्वारा गिरफ्तार व्यक्तियों को थाने के बाहर बैठाकर उनके फोटो खींचने, उन्हें मीडिया व सोशल मीडिया में प्रसारित करने और अपमानजनक परिस्थितियों में प्रस्तुत करने की प्रवृत्ति पर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने इस गंभीर मुद्दे पर स्वप्रेरणा (Suo Motu) संज्ञान लेते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी आरोपी को दोष सिद्ध होने से पहले अपराधी की तरह सार्वजनिक रूप से अपमानित करना न केवल असंवैधानिक है, बल्कि यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त जीवन और गरिमा के अधिकार का सीधा उल्लंघन है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति फरजंद अली की एकलपीठ ने की।
- अंतरिम आदेश, सोशल मीडिया से तत्काल हटें तस्वीरें :
हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए पुलिस को निर्देश दिया कि यदि गिरफ्तार व्यक्तियों की तस्वीरें या उनसे संबंधित सामग्री किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, वेब पोर्टल या अन्य माध्यम पर अपलोड की गई हैं, तो उन्हें तुरंत हटाया जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून के दायरे में रहते हुए की गई गिरफ्तारी को सार्वजनिक तमाशा बनाना स्वीकार्य नहीं है। वरिष्ठ अधिवक्ता की फोटो वायरल करने पर जोधपुर पुलिस आयुक्त को निर्देश एकलपीठ ने हाल ही में थाने में एक वरिष्ठ अधिवक्ता को नीचे बैठाकर फोटो वायरल किए जाने के मामले में भी स्वप्रेरणा संज्ञान लिया।
इस प्रकरण में जोधपुर पुलिस आयुक्त को आदेश दिया गया कि अधिवक्ता की वायरल तस्वीरें 24 घंटे के भीतर सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, वेब पोर्टल्स और अन्य माध्यमों से हटाई जाएं तथा इसकी अनुपालन रिपोर्ट न्यायालय में पेश की जाए। जैसलमेर एसपी को शपथपत्र दाखिल करने के आदेश हाईकोर्ट ने मीडिया रिपोर्ट के आधार पर एक अन्य मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए जैसलमेर के पुलिस अधीक्षक को शपथपत्र दाखिल कर आरोपों पर स्पष्ट जवाब देने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि पुलिस की ओर से किसी भी गिरफ्तार व्यक्ति की तस्वीरें सार्वजनिक की गई हों, तो उन्हें तत्काल हटाना सुनिश्चित किया जाए। सरकार को नोटिस, महाधिवक्ता को जवाब दाखिल करने के निर्देश राजस्थान हाईकोर्ट ने इस तरह के मामलों में राज्य सरकार को भी नोटिस जारी किया है। अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपक चौधरी को प्रतिवादियों की ओर से नोटिस स्वीकार करने और रिट याचिका पर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही पुलिस अधीक्षक, जैसलमेर को रिट याचिका में लगाए गए आरोपों का विशिष्ट खंडन करते हुए शपथपत्र प्रस्तुत करने को कहा गया है। 24 घंटे में हटाई जाएं अधिवक्ता की तस्वीरें जोधपुर में अधिवक्ता मोहन सिंह रत्नू को थाने में बैठाकर फोटो वायरल करने के मामले में हाईकोर्ट ने सख्त आदेश देते हुए कहा कि 24 घंटे के भीतर उनकी तस्वीरें सभी वेब पोर्टल्स, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और अन्य माध्यमों से हटाई जाएं।
न्यायालय ने इस संबंध में अगली सुनवाई पर अनुपालन रिपोर्ट पेश करने के आदेश भी दिए हैं। न्यायमित्र नियुक्त, 28 जनवरी को अगली सुनवाई इस पूरे प्रकरण में हाईकोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता देवकीनंदन व्यास को न्यायमित्र नियुक्त किया है। मामले की अगली सुनवाई 28 जनवरी को निर्धारित की गई है, जिसमें पुलिस और सरकार की ओर से की गई कार्रवाई की समीक्षा की जाएगी। कोटा संभाग से जुड़े मामलों पर भी नजर कोटा संभाग में भी ऐसे कई मामलों को लेकर हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की गई हैं।
- कोटा में हुए मामले पर भी पुलिस पर होगी बड़ी कार्रवाई :
कोटा शहर के वरिष्ठ पत्रकार रवि सामरिया के विरुद्ध पुलिस द्वारा कथित रूप से झूठा मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल करने और प्रेस नोट जारी कर उन्हें विभिन्न माध्यमों से प्रसारित करने का आरोप लगाया गया है, जिससे उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचा। यह मामला बेहद गंभीर बताया जा रहा है, जिसमें एसीबी अधिकारी सहित आईजी कोटा रेंज, एसपी, एएसपी, सीआई और एसआई सहित कुछ मीडिया संस्थान और कुछ सोशल मीडिया के कथित पत्रकारों की भूमिका पर सवाल उठे हैं। इस प्रकरण की सुनवाई अप्रैल में प्रस्तावित है और यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो पुलिस अधिकारियों व मीडिया पर बड़ी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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