कोटा हाईवे पर थमा काफिला, वसुंधरा के उतरते ही जागा प्रशासन
Kota cattle issue Former Minister Vasundhara Raje convoy stuck in highway jam News By MHR NEWS Media House Rajasthan
- पूर्व मुख्यमंत्री ने सड़क पर उतरकर संभाली स्थिति प्रशासन को दी सख्त चेतावनी
स्पेशल रिपोर्ट | मीडिया हाउस राजस्थान | कोटा |
शहर में गोवंश की सुरक्षा को लेकर उभरे आक्रोश ने रविवार को बड़ा रूप ले लिया। राष्ट्रीय करणी सेना एवं गौसेवकों द्वारा कोटा नेशनल हाईवे स्थित हैंगिंग ब्रिज को जाम कर दिया गया। इसी दौरान वहां से गुजर रहा राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का काफिला भी जाम में फंस गया। स्थिति को भांपते हुए पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे स्वयं अपने वाहन से उतरीं और मौके पर मौजूद युवाओं व गौसेवकों की भावनाओं को गंभीरता से सुना। उन्होंने बिना देर किए कोटा आईजी, एसपी सहित जिला प्रशासन एवं नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर तलब किया और तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
- एक महीने पुरानी घटना बनी आक्रोश की जड़ :
गौरतलब है कि लगभग एक माह पूर्व नयागांव क्षेत्र के जंगल में गोमांस पकाने और गोवंश की निर्मम हत्या का वीडियो वायरल हुआ था। इस घटना के बाद से ही गौसेवक संगठनों में भारी रोष था और वे आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे। कार्रवाई में देरी से नाराज होकर गौसेवकों ने पहले अनंतपुरा चौराहे को जाम किया और बाद में हाईवे पर प्रदर्शन तेज कर दिया। मौके पर पहुंचा प्रशासन, हालात हुए काबू पूर्व मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद आईजी, एसपी सहित संभाग के तमाम वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से संवाद कर आश्वासन दिया, जिसके बाद स्थिति धीरे-धीरे शांत हुई और धरना समाप्त किया गया।
- वसुंधरा राजे की दो टूक चेतावनी :
वसुंधरा राजे ने प्रशासन को सख्त लहजे में कहा कि गोवंश के हत्यारों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए। इस प्रकार की घटनाओं पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। गौसेवकों की मांग पूरी तरह जायज है। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले में शीघ्र कार्रवाई कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए और स्पष्ट किया कि वह स्वयं इस मामले की फॉलोअप समीक्षा करेंगी।
- गौसेवकों और युवाओं ने जताया आभार :
मौके पर मौजूद युवाओं और गौसेवकों ने पूर्व मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता और त्वरित हस्तक्षेप के लिए आभार जताया। साथ ही प्रशासन द्वारा मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालने पर भी संतोष व्यक्त किया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि गोवंश का विषय केवल कानून नहीं, बल्कि समाज की गहरी आस्था और भावनाओं से जुड़ा मुद्दा है, जिसे हल्के में लेना भारी पड़ सकता है।
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