कोटा का जेके लोन अस्पताल बना अव्यवस्थाओं का अड्डा: मातृ-शिशु सेवाएं चरमराई, महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान पर बड़ा संकट

Big Khabar Kota City JK LONE Hospital News by MHR NEWS Network

May 11, 2026 - 13:25
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कोटा का जेके लोन अस्पताल बना अव्यवस्थाओं का अड्डा: मातृ-शिशु सेवाएं चरमराई, महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान पर बड़ा संकट

कोटा संभाग का सबसे बड़ा मातृ एवं शिशु अस्पताल जेके लोन, जहां हजारों महिलाएं और नवजात जीवन की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, आज गंभीर अव्यवस्थाओं, लापरवाहियों और संवेदनहीन प्रबंधन का प्रतीक बनता जा रहा है। अस्पताल प्रशासन द्वारा ओपीडी को ऑनलाइन करने के दावे जरूर किए गए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। केंद्रीय प्रयोगशाला में आज भी रजिस्ट्रेशन ऑफलाइन किया जा रहा है जैसे जटिल फॉर्म भरवाए जाते हैं, जिससे लंबी कतारें लगती हैं और गर्भवती व कमजोर महिलाओं को घंटों तक खड़ा रहना पड़ता है। यह स्थिति डिजिटल व्यवस्था के दावों की पोल खोलती नजर आती है।

अस्पताल की साफ-सफाई व्यवस्था भी बेहद चिंताजनक बनी हुई है। ओपीडी, वार्ड, लैब और शौचालयों में गंदगी का आलम है। यूरिन सैंपल देने आने वाली महिलाओं को गंदे टॉयलेट का उपयोग करना पड़ता है, वहीं पीने के पानी तक में स्वच्छता का अभाव देखने को मिलता है, जिससे संक्रमण का खतरा लगातार बना रहता है। नई ओपीडी बिल्डिंग बनने के बावजूद वहां भी अव्यवस्था और गंदगी साफ नजर आती है, जो अस्पताल प्रबंधन की गंभीर लापरवाही को दर्शाती है। महिला सुरक्षा के मुद्दे पर हालात और भी ज्यादा चिंताजनक हैं। महिला वार्डों में पुरुष सुरक्षा गार्ड तैनात हैं और अस्पताल परिसर में महिला पुलिस चौकी तक नहीं है। कई संवेदनशील स्थानों पर पुरुष कर्मचारियों की मौजूदगी से महिलाएं असहज महसूस करती हैं। एक महिला एवं शिशु अस्पताल में इस तरह की व्यवस्था कई गंभीर सवाल खड़े करती है। वहीं महिला डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी भी साफ दिखाई देती है, जिससे महिलाओं को सहज और सुरक्षित माहौल नहीं मिल पाता। ऑपरेशन थिएटर को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं।

मरीजों का कहना है कि जिस डॉक्टर को वे अपनी समस्या बताती हैं, ऑपरेशन के समय अक्सर कोई अन्य डॉक्टर मौजूद रहता है। ऑपरेशन के दौरान पुरुष कर्मचारियों की उपस्थिति महिलाओं में असहजता और भय का कारण बनती है। इसके अलावा कुछ मामलों में जूनियर स्टाफ के अनुचित व्यवहार की शिकायतें भी सामने आई हैं, जिससे अस्पताल की साख पर सवाल उठने लगे हैं। अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों के लिए कोई स्पष्ट मार्गदर्शन व्यवस्था भी उपलब्ध नहीं है। हेल्प डेस्क या परामर्श केंद्र का अभाव होने के कारण लोगों को ओपीडी, जांच और भर्ती के लिए अलग-अलग स्थानों पर भटकना पड़ता है।

नई बिल्डिंग बनने के बावजूद अस्पताल की कार्यप्रणाली पुराने और बिखरे हुए ढांचे पर ही आधारित है, जिससे सुविधाओं का पूरा लाभ मरीजों तक नहीं पहुंच पा रहा। दवाइयों और टीकाकरण की उपलब्धता भी अधूरी बनी हुई है। कई जरूरी वैक्सीन जैसे इन्फ्लुएंजा अस्पताल में उपलब्ध नहीं हैं। मरीजों को वही दवाइयां दी जाती हैं जो स्टॉक में होती हैं, जबकि बच्चों और महिलाओं के लिए आवश्यक पोषण सप्लीमेंट्स की भी कमी बनी रहती है। नसबंदी ऑपरेशन के बाद मिलने वाली ₹2000 की प्रोत्साहन राशि 8 से 10 महीने की देरी से मिलती है और प्रमाण पत्र जारी करने में भी लंबा समय लग जाता है, जो सरकारी योजनाओं के धीमे क्रियान्वयन को दर्शाता है। तीमारदारों के लिए भी अस्पताल में कोई समुचित व्यवस्था नहीं है।

खासतौर पर महिलाओं के साथ आने वाले परिजनों को न तो सुरक्षित विश्राम स्थल मिलता है और न ही मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं। रात के समय लोग फर्श या खुले स्थानों पर रहने को मजबूर होते हैं, जो मानवीय संवेदनाओं पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। इन सबके बीच अस्पताल पर कुछ गंभीर आरोप भी लग रहे हैं कि रेजिडेंट डॉक्टरों द्वारा गर्भवती महिलाओं पर बिना पर्याप्त अनुभव के प्रैक्टिस की जा रही है। लगातार महिलाओं की मृत्यु और किडनी फेलियर जैसे मामलों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

कुछ लोगों द्वारा अवैध अंग सप्लाई जैसे गंभीर सवाल भी उठाए जा रहे हैं, हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ऐसे दावे अस्पताल की छवि को गहरा नुकसान पहुंचा रहे हैं। कुल मिलाकर जेके लोन अस्पताल में चिकित्सा सेवाओं के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं, सुरक्षा, स्वच्छता और प्रबंधन की गंभीर कमी साफ दिखाई देती है। यह स्थिति न केवल मरीजों के स्वास्थ्य बल्कि उनके सम्मान और विश्वास को भी प्रभावित कर रही है। अब समय आ गया है कि सरकार, प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन मिलकर तत्काल ठोस और प्रभावी कदम उठाएं, ताकि माताओं और बच्चों को सुरक्षित, सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें, अन्यथा यह अस्पताल अपनी पहचान और भरोसा दोनों खोता नजर आएगा।

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