करोड़ों की संपत्ति के लिए भाई-भतीजे ने कराई शकुंतला की हत्या! नगर निगम ने एक ही स्थान के जारी किए चार पट्टे

News special inside story investigation by Shakuntala Prajapati murder case Kota

Jul 12, 2025 - 17:01
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करोड़ों की संपत्ति के लिए भाई-भतीजे ने कराई शकुंतला की हत्या! नगर निगम ने एक ही स्थान के जारी किए चार पट्टे

कोटा। रामपुरा कोतवाली थाना क्षेत्र के गीता भवन रोड स्थित झोपड़ी से 64 वर्षीय समाजसेवी शकुंतला प्रजापति का सड़ा-गला शव 27 अप्रैल 2024 को बरामद होने से इलाके में सनसनी फैल गई। मृतका पिछले 40 वर्षों से उसी स्थान पर निवासरत थी तथा एक सामाजिक संस्था व निशुल्क सिलाई केंद्र का संचालन कर रही थी। प्रारंभिक जांच में पुलिस ने मौत का कारण बीमारी बताकर मामला शांत कर दिया, लेकिन अब यह मामला करोड़ों की संपत्ति हड़पने की साज़िश व हत्या की ओर इशारा कर रहा है।

- हत्या या षड्यंत्र?

एडवोकेट भुवनेश शर्मा ने बताया कि मामले में मृतका की मुंहबोली बेटी संगीता (निवासी इंदौर) ने कोर्ट में याचिका दायर कर संदेह जताया है कि शकुंतला की हत्या उसके भाई रामराज, भाभी रुक्मणी, भतीजा कपिल और कथित प्रॉपर्टी डीलर सुनील पटोना, सुनील माखिजा ने मिलकर की है। पूर्व में शहर एसपी को ज्ञापन भी दिया था। आरोप है कि संपत्ति हड़पने के लिए पूर्व नियोजित षड्यंत्र रचा गया और जाली दस्तावेजों के सहारे प्रॉपर्टी का अवैध हस्तांतरण भी शुरू कर दिया गया। 

- नगर निगम की बड़ी लापरवाही :

जांच में सामने आया है कि जिस भूखंड पर शकुंतला वर्षों से निवासरत थीं, उसी पर नगर निगम कोटा ने अलग-अलग व्यक्तियों के नाम तीन पट्टे जारी कर दिए। जानकारी के अनुसार पहला पट्टा शकुंतला की बुआ रामकंवरी बाई के नाम एक रुपए में वर्ष 1988 में तत्कालीन आयुक्त करण सिंह द्वारा जारी किया गया था और दूसरा वर्ष 2000 में द्वारा रामराज प्रजापति और तीसरा पट्टा जून 2022 में शंकुतला और चौथा पट्टा भी वर्ष 2022 में संदिग्ध रुप से प्रॉपर्टी डीलर सुनील के नाम कथित दस्तावेज़ों के माध्यम से बनाया गया। यह नगर निगम की गंभीर प्रशासनिक चूक को उजागर करता है, जिससे भूमाफियाओं को गैरकानूनी कार्यों को अंजाम देने का अवसर मिला।

सूत्रों के अनुसार राम कंवरी बाई ने वर्ष 1993 में अपनी स्वयं संपत्ति का मालिकाना शकुंतला को सौंप दिया था। शकुंतला ने अपने भाई रामराज पर जाली पट्टा बनाने की रिपोर्ट दर्ज कराई और जाली पट्टा रद्द करने के लिए वर्ष 2002 में याचिका दायर कर विरोध जताया था। वर्ष 2022 में नगर निगम कोटा द्वारा शंकुतला प्रजापति को फ्री होल्ड का एक पट्टा जारी किया जिसे बाद में वर्ष 2023 में खारिज भी कर दिया था!

- वसीयत से संगीता बनी थी संपत्ति की कानूनी वारिस :

वर्ष 2018 में शकुंतला प्रजापति ने अपनी संपूर्ण संपत्ति अपनी मुंह बोली बेटी संगीता के नाम वसीयत द्वारा रजिस्टर्ड कर दी थी। संगीता का दावा है कि वह शकुंतला की सेवा करती रही और उन्हीं के कहने पर कोटा में रहकर सिलाई केंद्र के कार्यों में भी सहयोग करती थी। संगीता ने मामले में हत्या की आशंका को लेकर कोटा एसपी अमृता दुहन, आईजी रवि दत्त गौड़ को शिकायत सौंपी व कोर्ट में स्वतंत्र याचिका लगाकर जांच की मांग की है। मृतका को पहले से ही अपने परिजनों से जानमाल का खतरा था और अब उसे भी धमकियां मिल रही हैं। 

- कानूनी राय और अगली कार्रवाई :

पीड़िता के अधिवक्ता ने बताया कि मामला अत्यंत गंभीर है, जिसमें जालसाजी, आपराधिक षड्यंत्र और नगर निगम की प्रशासनिक लापरवाही स्पष्ट रूप से उजागर हो रही है। कानूनी तौर पर दोषियों के विरुद्ध हत्या, जालसाजी और धोखाधड़ी की धाराओं में कार्यवाही की मांग की जा रही है। पुलिस की कार्यशैली भी संदेह के घेरे में हैं।

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