नरेश मीना एक नाम जो संघर्ष से निकला और अब जनक्रांति का प्रतीक बन गया

News Story MHR DIGITAL Media House Rajasthan by Naresh Meena Youth Leader Baran Atru

Jul 20, 2025 - 23:04
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नरेश मीना एक नाम जो संघर्ष से निकला और अब जनक्रांति का प्रतीक बन गया
नरेश मीना एक नाम जो संघर्ष से निकला और अब जनक्रांति का प्रतीक बन गया

(रिपोर्ट: मीडिया हाउस राजस्थान)

राजस्थान के बारां जिले की अटरु तहसील के ग्राम नयागांव से निकलकर राजनीति के अखाड़े में हलचल मचाने वाले युवा नेता नरेश मीना का नाम आज हर जुबां पर है। कोई उन्हें राजनीतिक बागी कहता है, तो कोई जनता का सच्चा सिपाही। लेकिन सच्चाई ये है कि नरेश मीना की कहानी सिर्फ राजनीति की नहीं, बल्कि संघर्ष, साहस और सच्चाई की लड़ाई की भी है। नरेश मीना एक राजनीतिक परिवार से आते हैं। पिता 30 वर्ष तक सरपंच रहे, माता वर्तमान में सरपंच, पत्नी जिला परिषद सदस्य और दूसरी बहू पंचायत समिति सदस्या है। नरेश मीना राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र नेता व महासचिव रहे हैं। पूर्व में कांग्रेस कार्यकर्ता, लेकिन टिकट न मिलने के बाद वे बाग़ी हो गए, और कई बार निर्दलीय चुनाव लड़े हैं।

- गांव की गलियों से जेल की कोठरी तक और फिर जनता की गोद में वापसी:

नरेश मीना ने राजनीति का रास्ता सत्ता के लोभ में नहीं, बल्कि जनता की पीड़ा को आवाज देने के लिए चुना। वे मीणा समाज से आते हैं एक ऐसा तबका जिसे आज भी कई बार राजनीतिक प्रतीक बनाकर इस्तेमाल किया जाता है, मगर नरेश ने इसे सशक्तिकरण का माध्यम बनाया। 2024 में टोंक जिले के एक SDM को थप्पड़ मारने की घटना से वे रातोंरात चर्चा में आ गए। कुछ ने उन्हें (गुंडा) कहा, तो कुछ ने (नायक) मामला अदालत पहुंचा और वे लगभग 8 महीने जेल में रहे।

- जेल से निकलते ही नायक जैसी वापसी :

15 जुलाई 2025, ये तारीख नरेश मीणा के जीवन में इतिहास बन गई। जैसे ही वे टोंक जेल से बाहर आएं। लाखों लोगों की भीड़ उनके स्वागत में खड़ी थी। ढोल-नगाड़ों से लेकर फूलों की वर्षा तक, यह दृश्य किसी वीर योद्धा की घर वापसी जैसा था। रिहाई के बाद प्रेसवार्ता में नरेश मीना ने कहां मैं कोई मसीहा नहीं... पर जनता का दर्द समझने वाला एक बेटा जरूर हूं। राजस्थान हाईकोर्ट ने SDM थप्पड़ केस में हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोपों पर रोक लगाई। कोर्ट ने कहा कि वीडियो में हमला जरूर दिख रहा है, मगर वो हत्या की मंशा से नहीं था। यह एक न्याय की जीत थी, जिसने नरेश को फिर से राजनीतिक धरातल पर मजबूती दी।

- अब जनक्रांति यात्रा से नया जनांदोलन :

रिहाई के बाद नरेश मीणा ने 21 जुलाई 2025 से जनक्रांति यात्रा का ऐलान किया। इस यात्रा में उन्होंने 11 सूत्रीय मांगें रखीं जिनमें नशा मुक्ति, भ्रष्टाचार विरोध, बेरोजगारी, किसान कर्जमाफी, और महिलाओं की सुरक्षा शामिल हैं। उन्होंने अपने भाषण में यहां तक कह दिया जो नेता जनता से झूठ बोलें, उन्हें जूतों की माला और थप्पड़ों से स्वागत मिलना चाहिए। ये शब्द आम तौर पर आक्रोश माने जाते हैं, लेकिन नरेश इन्हें जनता की पीड़ा की प्रतिध्वनि बताते हैं। भले ही नरेश मीणा किसी पार्टी में नहीं हैं, पर उनकी राजनीतिक उपस्थिति इतनी मज़बूत हो चुकी है कि अब वे भाजपा हो या कांग्रेस दोनों के लिए विचारणीय नाम बन चुके हैं। वसुंधरा राजे के प्रति सहानुभूति जताकर उन्होंने भाजपा के आंतरिक संघर्ष को भी खुलकर सामने रखा।

- युवा नेता या क्रांतिकारी?

नरेश मीणा को आप केवल एक युवा नेता नहीं कह सकते वे एक प्रेरणा हैं उन युवाओं के लिए, जो सिस्टम से सवाल पूछने का साहस रखते हैं। वे भीड़ से नहीं चलते भीड़ उनके साथ चलती है। वे सत्ता के लिए नहीं लड़ते सत्य के लिए लड़ते हैं।

- कुछ रोचक तथ्य :

नरेश मीना से जुड़े नरेश का जन्मस्थान समरावता, बारां जिला, राजस्थान है। शिक्षा स्नातक, सामाजिक अध्ययन और पहली बड़ी चर्चा SDM थप्पड़ कांड, 2024 में जेल 8 महीने तक (टोंक जिला कारागृह), प्रेरणा स्रोत भगत सिंह और डॉ. अम्बेडकर, प्रमुख आंदोलन जनक्रांति यात्रा (2025) प्रमुख मुद्दे बेरोजगारी, आरक्षण, भ्रष्टाचार है। राजनीति में ऐसे किरदार बहुत कम होते हैं जो सत्ता से पहले जनसमर्थन जीत लेते हैं। नरेश मीणा उन गिने-चुने नामों में से एक हैं। उनकी राजनीति में ‘जन’ है, उनके विचारों में ‘क्रांति’, और उनके संघर्ष में ‘सत्य’ की आग। संघर्षों से निकली यह आग अब चिंगारी नहीं, एक लपट है जिसका नाम नरेश मीणा है।

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