झालावाड़ के पीपलोदी गांव में सरकारी स्कूल की जर्जर इमारत ढही, 7 बच्चों की दर्दनाक मौत, 29 घायल
News By MHR NEWS Media House Rajasthan
झालावाड़, 25 जुलाई 2025।
राजस्थान के झालावाड़ जिले के पीपलोदी गांव में शुक्रवार सुबह एक दिल दहला देने वाला हादसा हो गया, जब एक सरकारी माध्यमिक विद्यालय की पुरानी और जर्जर इमारत की छत अचानक उस वक्त ढह गई, जब बच्चे प्रार्थना सभा से लौटकर अपनी कक्षा में बैठने ही वाले थे। हादसे में अब तक 7 मासूम बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि 29 अन्य बच्चे घायल हैं, जिनमें से कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।
मृतकों में पायल (14), प्रियंका (14), हरिश (8), मीना (8), सोंभाई (5), मिथुन (11) सभी भील समुदाय से, और कार्तिक (18) लोधा समुदाय से हैं। बताया जा रहा है कि हादसे के समय बच्चे प्रार्थना के बाद कक्षा में जा रहे थे, तभी स्कूल भवन की छत और दीवार अचानक भरभरा कर गिर गई, जिससे बच्चे मलबे के नीचे दब गए। ग्रामीणों ने तुरंत प्रशासन को सूचित किया और खुद भी राहत-बचाव कार्य में जुट गए।
स्थानीय प्रशासन, पुलिस और एसडीआरएफ की टीमों ने मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने का काम शुरू किया। सभी घायलों को पहले मनोहरथाना अस्पताल और फिर झालावाड़ जिला अस्पताल रेफर किया गया। यह स्कूल भवन लगभग 78 साल पुराना बताया जा रहा है और कई वर्षों से इसकी मरम्मत की मांग की जा रही थी। ग्रामीणों के अनुसार, स्कूल भवन की हालत जर्जर थी, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन ने बच्चों को उसी भवन में पढ़ाने की अनुमति दी हुई थी।
आश्चर्यजनक बात यह है कि करीब ₹4.28 करोड़ का मरम्मत बजट स्वीकृत होने के बावजूद यह फाइल वित्त विभाग में अटकी हुई थी। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कुछ बच्चों ने स्कूल प्रशासन को कुछ दिन पहले ही छत से गिरते मलबे की शिकायत की थी, लेकिन उन्हें आश्वस्त कर क्लास में बैठने के लिए कहा गया था। इस गंभीर लापरवाही के बाद राजस्थान सरकार ने कड़ी कार्रवाई करते हुए 5 शिक्षकों को तत्काल निलंबित कर दिया है। साथ ही, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। राज्य मानवाधिकार आयोग ने भी मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए 7 दिनों में पूरी रिपोर्ट मांगी है।
विपक्ष के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने भी प्रशासनिक असफलता और शिक्षा विभाग की लापरवाही पर सवाल उठाए हैं और मृतक बच्चों के परिजनों को मुआवजे की मांग की है। पीपलोदी की यह घटना न सिर्फ एक प्रशासनिक विफलता है, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की अनदेखी और ग्रामीण क्षेत्रों की उपेक्षा को उजागर करती है।
जर्जर स्कूल भवनों में पढ़ रहे लाखों बच्चों की सुरक्षा पर यह एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। ग्रामीणों और बच्चों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, गांव में मातम पसरा हुआ है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस हादसे से क्या सबक लेता है और क्या वास्तव में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी बाकी हादसों की तरह फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।
यह समाचार मीडिया हाउस राजस्थान द्वारा जारी किया गया। यदि आप इस घटना से जुड़ी किसी सहायता या प्रतिक्रिया के लिए संपर्क करना चाहें, तो कृपया हमसे जुड़ें। 7891030011
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