सावन के महीने में करें गुप्त शिवलिंग के दर्शन

चतुर्मुख शिवलिंग के दिव्य दर्शन पहली किरण सीधी शिवलिंग पर गिरती है।

Jul 12, 2025 - 12:38
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सावन के महीने में करें गुप्त शिवलिंग के दर्शन
सावन के महीने में करें गुप्त शिवलिंग के दर्शन
सावन के महीने में करें गुप्त शिवलिंग के दर्शन

श्रावण मास हिंदू पंचांग का अत्यंत पावन और धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण महीना है। यह मास विशेष रूप से भगवान शिव को समर्पित होता है और इस दौरान शिव भक्त व्रत, उपवास, रुद्राभिषेक, और महामृत्युंजय जाप जैसे अनुष्ठानों के माध्यम से भोलेनाथ की आराधना करते हैं। ऐसा माना जाता है कि श्रावण के महीने में भगवान शिव धरती पर अधिक सक्रिय रहते हैं और अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। इस महीने के प्रत्येक सोमवार को ‘श्रावण सोमवर व्रत’ का विशेष महत्व होता है, जिसमें शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, दूध, और भस्म अर्पित की जाती है। यह महीना वर्षा ऋतु का समय होता है, जो प्रकृति और वातावरण को भी शुद्ध और आध्यात्मिक बना देता है। श्रावण मास न केवल शिव भक्ति का प्रतीक है, बल्कि संयम, आस्था और आत्मशुद्धि का एक महत्वपूर्ण अवसर भी है। "श्रावण का हर सोमवार, शिव भक्ति का उपहार!" श्रावण मास में क्या करें और किन बातों का ध्यान रखें? श्रावण मास शिवभक्ति, संयम और साधना का महीना होता है। इस पवित्र मास में कुछ विशेष कार्य करना शुभ माना जाता है, वहीं कुछ बातों से परहेज़ करना चाहिए। नीचे श्रावण मास में पालन करने योग्य बातें दी गई हैं: -श्रावण मास में क्या करें: -प्रति सोमवार व्रत रखें: श्रद्धा के साथ "श्रावण सोमवर व्रत" करें और शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, भस्म, धतूरा आदि अर्पित करें।रुद्राभिषेक करें: शिवलिंग का जल, दूध, शहद, दही आदि से अभिषेक करें और "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें। -भगवान शिव की आरती करें: प्रातः और संध्या समय दीप जलाकर शिव आरती करें।धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें: शिवपुराण, रामचरितमानस, श्रीमद्भागवत, और भगवद गीता का पाठ शुभ होता है।भोजन में सात्विकता रखें: मांसाहार, लहसुन-प्याज आदि से परहेज़ करें और सात्विक व्रत का भोजन करें।दान-पुण्य करें: गरीबों को अन्न, वस्त्र, जल और छाया प्रदान करना पुण्यदायक होता है। - इन बातों का रखें विशेष ध्यान: नशे से बचें: शराब, तंबाकू, सिगरेट आदि का सेवन पूरी तरह त्याग दें। क्रोध और झूठ से दूर रहें: इस मास में मन, वाणी और कर्म की पवित्रता बनाए रखें। काले कपड़े न पहनें: विशेष रूप से पूजा के समय सफेद या हल्के रंग के वस्त्र पहनें। बाल कटवाना या नाखून काटना टालें (विशेषकर सोमवार को): परंपराओं के अनुसार इसे शुभ नहीं माना गया है। किसी की बुराई या अपमान न करें: ये समय आत्मशुद्धि और सकारात्मकता का होता है। विशेष सुझाव: "ॐ नमः शिवाय" का रोज़ जाप करें। सोमवार को शिव मंदिर जाकर जल चढ़ाएं। गरीबों और ज़रूरतमंदों की सेवा करें।अगर आप हाडोती के रहने वाले हैं तो सावन के महीने में इस प्राचीन शिव मंदिर में जाकर जरूर दर्शन करें।कंसुआ धाम – कोटा का सबसे प्राचीन और ऐतिहासिक शिव मंदिर प्राचीनता और पौराणिक महत्त्व मंदिर का निर्माण विक्रम संवत 795 (738 ईस्वी) में मौर्यवंशी राजा धवल द्वारा उनके सेनापति शिवगण के नेतृत्व में कराया गया था। इसे महर्षि कण्व का आश्रम माना जाता है, जहाँ शकुंतला का विवाह राजा दुष्यंत से हुआ और पुत्र भरत का जन्म हुआ—जिससे 'भारत' नाम लिया गया। -स्थापत्य विशेषताएँ: मंदिर में दुर्लभ चतुर्मुख शिवलिंग (चार मुख वाला) प्रतिष्ठित है, जहां सूर्य की पहली किरण सीधे गिरती है। गर्भगृह और चारों ओर हजारों छोटे छोटे शिवलिंग स्थापित हैं, जिनमें एक पांच फीट ऊँचा सहस्त्रलिंगण भी है। दीवारों पर कुटिल लिपि में खुदे शिलालेख हैं—देश के बेहतरीन शिलालेखों में से एक—जिसमें मंदिर और कण्व आश्रम का वर्णन मिलता है। - प्राकृतिक और धार्मिक दृष्टिकोण: मंदिर चंबल नदी के किनारे स्थित है, और परिसर में एक कुंड है जिसमें पानी कभी सूखता नहीं जिसे त्वचा रोग में लाभदायक माना जाता है। मंदिर सूर्योदय से सूर्यास्त तक खुला रहता है। सुबह 7 बजे और शाम 7:30 बजे नियमित आरती होती है। यहाँ महाशिवरात्रि, श्रावण सोमवती अमावस्या, कार्तिक पूर्णिमा आदि पर्वों पर मेलों का आयोजन होता है; सावन के दिन विशेष श्रद्धा देखी जाती है। प्रशासनिक संरक्षण और जीर्णोद्धार 1972 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने मंदिर को संरक्षण में लिया—17वीं सदी में शिखर का जीर्णोद्धार हुआ, और बाद में अन्य पुनरुद्धार कार्य भी हु। हाल ही में 'गुप्त शिवलिंग' के दर्शन सार्वजनिक रूप से खोले गए, सिर्फ श्रावण सोमवती, सोमवार और महाशिवरात्रि पर—जिसमें भीड़ देखी जाती है। अनूठी मूर्तिकला और परिवार स्वरूप मंदिर में भगवान शिव के साथ पूरा परिवार—माँ पार्वती, गणेश, कार्तिकेय, देवी सती और पुत्री अशोकासुंदरी—एक साथ विराजित हैं, यही विश्व में अनूठा माना जाता है । -अवश्य जाने योग्य बातें: स्थान कोटा, चंबल नदी तट (Kansua / Kanswa गाँव) समय सुबह 6–9 व जून से अगस्त तक (श्रावण में विशेष दर्शन) प्रवेश नियम जूते बाहर रखें, कपड़ा संयमित, परिसर में कैमरा–वीडियो की अनुमति है विशेष पूजा श्रावण, महाशिवरात्रि, सोमवती पर मेले और जल अभिषेक -चतुर्मुख लिंग पर पहली किरण का अनुभव: श्रावण मास में सोमवती और महाशिवरात्रि आगमन करें — मेलों का आनंद लें। पास में चंबल नदी तट पर पिकनिक और कुंड स्नान का आनंद लें। ऐतिहासिक शिलालेख और पुरातन मूर्तियों का अध्ययन करे हमारी जानकारी अगर आपको पसंद आई तो इसे लाइक शेयर कमेंट करना ना भूले।

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