निजी क्षेत्र के आयुर्वेद पंचकर्म अस्पतालों में सरकारी कार्मिकों का इलाज बंद, हज़ारों मरीज प्रभावित
News By MHR NEWS Media House Rajasthan
(रविशंकर मीडिया हाउस/जयपुर)।
राजस्थान के सरकारी कार्मिकों के लिए अब निजी क्षेत्र के आयुर्वेद पंचकर्म अस्पतालों में इलाज बंद कर दिया गया है। आरजीएचएस (राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम) का पोर्टल पिछले एक महीने से आयुर्वेद मरीजों के लिए बंद पड़ा है, जिससे हज़ारों कर्मचारियों और विशेषकर सेवानिवृत्त कार्मिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
राजस्थान प्राइवेट आयुर्वेद अस्पताल एसोसिएशन ने इस कदम का विरोध करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मांग की है कि पोर्टल को तुरंत शुरू किया जाए ताकि उपचार बाधित न हो। एसोसिएशन का कहना है कि सरकार ने जहां निजी क्षेत्र के 650 ऐलोपैथिक अस्पतालों को मान्यता दी है, वहीं आयुर्वेद अस्पतालों की संख्या महज़ 16 है। ऐसे में बजट का दो प्रतिशत हिस्सा भी आयुर्वेद अस्पतालों तक नहीं पहुँच पाता।
एसोसिएशन के महासचिव हनुमान पंचोली ने कहा कि संभव है कि कुछ अस्पतालों में गड़बड़ी हुई हो, लेकिन इसका दंड सभी आयुर्वेदिक अस्पतालों और मरीजों को देना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कई अस्पतालों ने भारी निवेश कर पंचकर्म चिकित्सा की आधुनिक सुविधाएँ विकसित की थीं, जिससे कार्मिकों का रुझान आयुर्वेद की ओर बढ़ा था। कई कार्मिक वर्तमान में अपने रोगों का इलाज आयुर्वेद से करवा रहे थे, लेकिन पोर्टल बंद होने से कई का उपचार अधूरा छूट गया है।
पंचोली ने यह भी मांग की कि जिन आयुर्वेद अस्पतालों का बकाया भुगतान रुका हुआ है, उसे भी तत्काल किया जाए। एसोसिएशन ने सरकार के इस कदम को आयुर्वेद पर कुठाराघात बताते हुए कहा कि यह तब हो रहा है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं स्वदेशी और आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के पक्षधर हैं। उनका मानना है कि एलोपैथी अस्थायी राहत देती है जबकि आयुर्वेद रोग का स्थायी निदान करता है।
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